अर्जुनदेव मीणा

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स्वर्गीय श्री अर्जुनदेव जी मीणा पुत्र श्री खुमाणी राम माउणदा खुर्द तहसील नीमकाथाना, जिला जयपुर (हाल में जिला सीकर) का जन्म सन् १८९५ में एक साधारण परिवार में हुआ l

माउणडा खुर्द से सन् १९०४ में आकर सभी मीणा परिवारों ने नयाबास गाँव बसाया l श्री अर्जुन देव जी की शिक्षा-दीक्षा आंठवी कक्षा तक शाहजहांपुर में अपनी बड़ी बहन के पास हुई l

सन् १९१५ में २० वर्ष की आयु में पुलिस में नियुक्त हुए किन्तु रजवाड़ों की हाकमशाही व पुलिस के जुल्मों से नफरत होने के कारण वे पुलिस की नौकरी छोड़कर वाणिज्य कर मालगुजारी विभाग में जयपुर-अजमेर रियासत की सीमा चौकी (राहदारी) आसलपुर–जोबनेर चैक पोस्ट पर दरोगा की हैसियत से राहदारी इंचार्ज के पद पर कार्य करने लगे, किन्तु स्वतंत्रता आंदोलनों की सरगर्मियों के चलते हुए इनमें भाग लेने लगे एवं सन् १९४४ में नीमकाथाना में मीणा समाज का सम्मलेन आमंत्रित किया l इस समय वे नीमकाथाना में ही राहदारी इन्चार्ज के पद पर कार्यरत थे l यह अखिल भारतीय मीणा समाज सम्मलेन १६, १७, १८ अप्रैल १९४४ तीन दिन चला, जिसमें जैन मुनि मगन सागर जी ने अध्यक्षता की एवं उद्घाटन श्री सत्यदेव ‘विध्या अलंकार’ ने किया जो की नवभारत टाइम्स समाचार पत्र के संपादक भी थे l इस सम्मलेन के स्वागत मंत्री स्वयं श्री अर्जुन देव जी थे एवं अन्य गणमान्य व्यक्तियों में राजेन्द्र कुमार ‘अजेय’, श्री लक्ष्मीनारायण झरवाल, पंडित बंशीधर जी, भैरवलाल काला बादल, तारासिंह जी इत्यादि थे l इसके पश्चात श्री अर्जुन देव जी ने सरकारी नौकरी छोड़कर अपने पुत्रों को भी आन्दोलन में शामिल करते हुए प्रशिक्षित किया l इस आन्दोलन के बाद अंग्रेजों ने उनको जयपुर जेल भेज दिया l करीब ११ महीने जेल में बंद रहने के बाद उनको छोड़ दिया गया l

जेल से आने के बाद भी वे लगातार आन्दोलनों में भाग लेते रहे और प्रचार करते रहे l जागीरदारी, पुलिस प्रशासन एवं अंग्रेजों की दमनकारी नीति के खिलाफ एवं मीणा जाति के साथ बैठ-बैगार, हाजरी (जरायम पेशा) कानून के खिलाफ जीवनभर आन्दोलन एवं प्रचार करते रहे l सन् १९७० में उनकी मृत्यु हो गई l

संदर्भ