आभानेरी चाँद बावड़ी

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आभानेरी चाँद बावड़ी
प्राचीन महत्व की धरोहर आभानेरी जिला दौसा में बांदीकुई शहर के रेल्‍वे स्‍टेशन बांदीकुई जंक्‍शन से मात्र 05 कि.मी. दूर है, यहॉ से हर समय आभानेरी के लिए परिवहन के साधन उपलब्‍ध होते हैं एवं सडक मार्ग से जयपुर -आगरा हाई वे पर सिकंदरा गाँव से बांदीकुई की तरफ 05 कि.मी. जाने पर आभानेरी मोड होते हुए 05 किलोमीटर उत्तर पशिम में हाई बेजोड़ संस्कृति को समेटे , वास्तुकला के अदभुत प्रतिक आभानेरी चाँद बावड़ी अनूठे शिल्प और कलात्मकता का अनुपम उदहारण है मीणा राजाओ दुवारा बनवाई जोण बावड़ी ,पन्ना मीणा बावड़ी और आभानेरी की चाँद बावड़ी में से चाँद बावड़ी बेजोड़ है | दौसा जिला दर्शन में इसे गुप्त कालीन या उसके बाद का माना गया है रजनीश शर्मा ने अपने लेख ; नष्ट होने लगा आभानेरी का पूरा वैभव ' में इसका निर्माण राजा चाँद दुवारा 1500 साल पूर्व किया गया बताया है मीणा जागा बही भाटो और स्थानीय जन श्रुतियो से डॉ प्रह्लाद मीणा संकलित व विसद शोध जो जय मिनेश पत्रिका के 5 फ़रवरी के अंक में छपी सामग्री के अनुसार - धुधाड़ा प्रदेश की प्राचीन राजधानी भानगढ़ थी जो आमेर से भी प्राचीन है जिसने राजा सीप राज्य करता था उसके नेपालक पुत्र हुवा बचपन में ही राजा रानी के मर जाने पर भानगढ़ की सत्ता नेपालक की मौसी के हाथ में आ गई | बृजमोहन जागा के अनुसार राजा मोर ध्वज का वंसज राजा जोंसी मीणा का आभानेरी और माचेडी पर अधिकार था बाद में आभानेरी राजा गेट के अधिकार में चली गई | इधर नेपालक युवा होने पर राजा गेट का सेनापति बन जाता बाद में अपना पैत्रिक राज्य भानगढ़ अपनी मौसी से प्राप्त कर लेता है मौसी आमेर चली जाती है नेपालक का विवाह राजा गेट की लड़की बखिया से हो जाता है और देहज में आभानेरी मिलती है राजा नेपालक के लड़का होता है जो राजा चंद के नाम से इतिहास में प्रसिद्द्ध होता है यह धुद्हड़ में अपना राज्य विस्तार करता है उसने अपने राज्य में कई नव निर्माण करवाए उनमे चाँद बावड़ी अबुपम है राजा चाँद का काल ई. सन की चौथी -पांचवी शताब्दी माना गया है .

संदर्भ



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