काबरा

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Author of this article is पी एन बैफलावत

Origin

प्राचीन खेराड-हाड़ोती प्रदेश में मीना आदिवासियो के प्रभुत्व का क्षेत्र रहा है यहाँ कई मीना कबीलों के छोटे छोटे मेवासे रहे है | जिसमे उषारा,दुमाला और काबरा प्रमुख है |

History

मीनपुराण भूमिका मुनि मगन सागर पृष्ट-25 पर एक लोक प्रचलित पद में मीना समाज के प्रसिद्द पांच गोत्रों का उल्लेख है .

कांकस,पबडी, काबरा, दुमालो की दौड़ | पहलां मीना ऊषारा,पीछे मीना और ||

उक्त दोहे में इस क्षेत्र में इन गोत्रों के वर्चस्व स्थापित करने की प्रतिस्पर्दा की सही व्याख्या की गई है इस क्षेत्र में वर्चस्व स्थापित करने में आख़िरकार उषारो ने बाजी मारी | पर अन्य भी कम नहीं थे काबरा भी टोडा (वर्तमान टोडा राय सिंह टोंक) मेवासा के प्रमुख थे | जैसा की मीणा आदिवासियों के साथ हर जगह धोखा हुआ यहाँ भी धोखे से चौहानों ने लगभग 1120 ई० के आस पास सत्ता छीन ली | यह पृथ्वीराज के सेनापति चामुंड राय की जागीर रहा रिपोर्ट ऑफ़ डी सेटलमेंट ऑफ़ टोंक 1892 पृष्ट-3 के उल्लेख व स्थानीय अभिलेखानुसार 12 विं शताब्दी के मध्य में टोंक और टोडा में चौहान प्रतिनिधि सान्तों जी के अधिकार में हो गए | फिर यह सोलंकियो के अधिकार में चले गया |

सन 1402 में राव डूंगर जी सोलंकी का राज्य था | काबरों के टोडा पर मेवाड़ के अमर सिंह के प्रपोत्र राय सिंह का अधिकार होने पर इसका नाम टोडा राय सिंह हुआ | प्राचीन काबरा गाँव बसा जो अब एक क़स्बा बन चूका है यह टोडा से अजमेर की तरफ जाने वाली रोड पर 10 किमी दुरी पर है | टोडा और काबरा से निकलकर काबरा मीणाओं ने गाँव-करवर (करवड) बसाया(वर्तमान नेनवा तहसील में ) गाँव ऊँची पहाड़ी पर बसा | देवा हाडा ने जैता उषारा से बूंदी छीन लेने के बाद 1242 ई० में काबरों से करवर जीत लिया | वहा पुराने खंडर मकानात के चिन्ह मोजूद है | पृष्ट-38 कोटा संभाग का इतिहास-डॉ मोहन लाल गुप्ता में उल्लेख है की देवा हाडा ने जसकरण से करवर परगना छीना | वर्तमान में इसी पहाड़ी के मैदान में करवर और बुढ़ करवर गाँव बसे है बुढ़ करवर में अब भी काबरा आबाद है | इस समय इस सम्पूर्ण क्षेत्र में मीणा और गौडो का दबदबा था |

दन्त कथा है की एक बार कोई आक्रमण हुवा तो दो काबरा भाइयो ने उनसे भयंकर मुकाबला किया सर काटने पर भी लड़ते रहे एक बुढ करवर और एक बासी दुखारी (दई क़स्बा तह-नेनवा ) में शहीद हुवा उनके पत्निया उनके साथ ही शहीद हुई जिनके स्थान वहा कर्मा और काली के नाम से स्मारक बने हुए है | काबरा गोत्र की ध्याड़ी –खेजड़ी वृक्ष है और नील की आड़ है |

Population

Distribution

जिला टोंक में नया गाँव,मंडावरा(तहसील उनियारा) व तहसील जहाजपुर में गाँव-टिक्कर, जिला बूंदी –1-त इंद्रगढ़ के अंतर्गत –गाँव-नवलपुरा-500, खाकटा400, दौलतपूरा -200,चन्द्र गंज-500, बेलन गंज-300,बाबाई-150, झीडा-400, 2- नेनवा के अंतर्गत – बुढ़ करवर -500,कुमारिया बंधा-50, समधी-200, सुंथली-300, कुम्हारिया-250, पाई-150, हीरापुरा-50, काशीपुरा-100, माणी-350, देवरिया-400, उरांसी-300, जीवनपुरा-100, बन्सोली-200, खजुरी-450, सहन-80, शिवदानपुरा-300, फतुकडा-100, खजुरा-200, खेड़ी-150, खुरी-300, 3- त-पीपल्दा-गाँव-श्रीपुरा-300, फरेरा-350, जिला-सवाईमाधोपुर की तहसील चौथ का बरवाड़ा में गुणशिला -500 जिला बारा की तहसील अंता का बावड़ी खेडा-300 प्रमुख काबरा गोत्र के मीणाओं के गाँव है कई दूसरे प्रदेशो में भी जाकर बस गए |

Notable persons

References