टाटू

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टाटू रणथम्भौर, सवाईमाधोपुर में प्रमुखता से पाये जाने वाला गोत्र है ।

Origin

History

राव हम्मीर मीणा वंशज प्राचीन क्षत्रिय कुल के टाटू गोत्र में पैदा हुए थे उनकी राजधानी रणथम्भौर थी । राजा हम्मीर अपने समय के महान हठी राजा माने जाते हैं । इनके विशेष गुण के सन्दर्भ में निम्न दोहा उल्लेखित है ।

सिंह-सवन, सत्पुरुष वचन, कदलन फलत एक बार । तिरिया-तेल, हम्मीर-हठ, चढ़े न दूजी बार ।।

रणथम्भौर का दुर्ग टाटू गोत्रीय शासन काल में निर्मित करवाया गया था । सवाईमाधोपुर से लगभग 14 कि. मी. दूर इसके पूर्व की ओर दुर्लभ पहाड़ियों के बीच बना हुआ यह दुर्ग अपने प्रत्यक्ष रूप को दर्शाता है । सैनिक दृष्टी से भारतीय इतिहास में यह दुर्ग अपना अलग ही महत्त्व रखता है । यह दुर्ग वास्तव में मीणा राज्य के वैभव का मौन साक्षी है । मीणा परंपरा के अनुसार इस दुर्ग को टाटू गोत्रीय मीणा राजा ने बनवाया था । अलाउद्दीन खलजी को इस दुर्ग को ढूँढने में कई मास लगे थे । इस दुर्ग के निर्माण के साक्ष्य के रूप में निम्न दोहा प्रचलित है ।

राजा लूटे फौजा मौडे, जिन उठकरे पौबारा । दो नगर टाटुओं का, किला रात भंवरगढ़ टटवारा ।। हम्मीर रासो में महिमा शाह तथा गबरू को मीणा बताया गया है । जिनको शरण देने से ही अलाउद्दीन खलजी का हम्मीर के साथ युद्ध हुआ था ।

टाटू लोग बड़े ही बहादुर एवं साहसी थे । टाटुओं को पराजित करने के लिए चौहानों ने अनेक उपाय किये, परंतु वे सब व्यर्थ रहे । जब टाटू नरेश जुझार सिंह की पुत्री का वैवाहिक सम्बन्ध सारंगदेव चौहान के साथ तय हो गया तो असंख्य चौहान सैनिकों ने बारातियों के रूप में आ कर धोके से किले को अधिकृत कर लिया और रणथम्भौर के टाटुओं का संहार कर दिया और चौहानों ने रणथम्भौर को अपनी राजधानी बना लिया ।

Population

Distribution

रणथम्भौर, सवाईमाधोपुर आदि ।

Notable persons

रणथम्भौर के राजा राव हम्मीर देव ।


References



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