पद

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      • पद ***

ये बात बहुत ही कम लोगों को पता है की पद मीनो में ही क्यों गाये जाते हैं । इसके पिच्छे एक बहुत ही दिल चस्प कहानी है - ये कहानी है एक विख्यात डाकू ' पदीया मीना ' की । जिसका जन्म 1836 में मारवाड़ में हुआ । बचपन से ही वह समाज के प्रति जागरूक था उसे ये भी पता था की उसके पूर्वज शासक थे ।

इसलिए उसने 13 वर्ष की अल्प आयु से ही डकेती डालना शुरू कर दिया । लेकिन ये इन डैकैतियों को अपने लिए नही बल्कि अंग्रेजो और मनुवादियो से शोषित जनता के भले के लिए करता था । जो बाद में डकेतो में शिरोमणि बन गया ।और लोगो ने उसे अपना रोबिन हुड मान लिया । जो अमीरों से लूट कर गरीबो में बाटने का काम करता था । इसलिए पदीया विख्यात डाकू था । लेकिन इस से मारवाड़ व् अन्य आस पास के मनुवादी और अंग्रेजो की नींद हराम हो गयी थी ।लेकिन उसे पकड़ पाना ना मुमकिन था । क्योंकि वह एक पल में यहा होता तो दुसरे पल कहीं और लोग उसकी इस फुर्ती के कायल थे । वह अकेला ही भेष बदल कर घूमता था ।कभी साधू कभी कुली एसे भेष बदल ने वह बहुत तेज था । और 30 लोगो से अकेला मुकाबला करने में सक्षम था ।

उसे पकड़ने के लिए जो सेना की टुकड़ी तैयार की गयी थी उसे 35 वर्ष बाद सफलता मिली । और उसे धोखे से सोते हुए गिरफ्तार किया गया । बताया जाता है की पुलिस को ये सुचना उसके ही साथी ने लोभ में आकर दी । लेकिन तब तक उसकी उम्र 52 वर्ष की हो गयी थी ।और अगस्त 1887 में उसे फांसी की सजा हुई जिसमे उसने 133 डैकती कबूल की ।

उसकी माँ भी वीरांगना थी क्योंकि जब उसकी माँ को उसकी गिरफ्तारी के बारे में मालूम हुआ तो वो दुखी होने की बजाय गुस्से में हो गयी । और अपने बेटे के पास जेल में गयी और बेटे से कहा -" जब तुम्हे गिरफ्तार किया गया उससे पहले तुमने आत्म हत्या क्यों नही करली ?" इससे पदीया के दिल को आहात हुआ । बताया जाता है मौत से पहले पदीया की आँखों में मौत का डर बिलकुल नही था । वह मौत से पहले जेल में खूब नांचा और गाया ।उसे अपनी मौत का डर नही था बल्कि उसे उसके कामो पर गर्व था । अंत में जब मौत की घडी के समय जब अंग्रेज उसको फ़ासी का फंदा लटकाने में डर रहे थे तब पदिया ने स्वयं हँसते हुए गले में फ़ासी के फंदे को डाला और वीर गति को प्राप्त हुआ ।और उसकी माँ ने कहा -" मुझे मेरे बेटे पर गर्व है ।मैं हर जन्म में अपने बेटे की माँ बनना चाहुगी "

बाद में लोगो ने उसकी कथाओ को गा कर सबके सामने लाया और कथाओ को " पद " के नाम से जाने लगा । लेकिन मनुवादियो को इससे अपनी हार दिखाई देती थी इसलिए उन्होंने अंग्रेजो को भड़का कर पदिया की कहानी की जगह अपनी नकली कहानी गवाना शुरू कर दिया । क्योंकि वे नही चाहते थे की मीना या अन्य आदिवासियों का इतिहास इस देश में रहे ।

साथियों अगर आप मीना हो तो इसे आगे शेयर करें ।और जिस भाई को ऐसी लुप्त मीनो की कथाओ के बारे में पता हो उसे सोशल मीडिया पर सबको बताये । ऐसे वीर और नेकदिल पदिया को मेरा शत शत नमन । 💐💐💐💐💐💐💐💐