पालीमाता

From meenawiki
Jump to: navigation, search
पाली माता मंदिर

बेफलावत और कुलदेवी पाली माता


राजस्थान पुरातन काल से ही विभिन्न जातियों, समुदायों, कला और संस्कृतियों से समृद्घ रहा है। शताब्दियों से जो विभिन्न जनजातियां यहां निवास कर रही हैं, उनके बारे में अधिकांश लोगों को बहुत कम जानकारी है। यह समय का चक्र है कि किसी समय इनका वैभव भी अपनी पराकाष्ठा पर था। इनके शौर्य की अनेक गाथाएं इतिहासकारों ने नहीं लिखीं। शिलालेखों और ताम्रपत्रों के पन्नों में इनका उल्लेख यत्र-तत्र बिखरा पड़ा है। राजस्थान की मीणा और भील जनजातियों को ही ले लीजिए। इतिहास बोलता है कि राजपूतों के उदय से पहले सारे राजस्थान पर इन्हीं लोगों का आधिपत्य था पर विजेता राजूपतों ने इनके इतिहास और संस्कृति का बड़ी निर्ममता के साथ विनाश कर दिया। नतीजतन इनके पुरातन गौरवपूर्ण इतिहास का बहुत कम अंश ही सुरक्षित रह पाया है। मीणा जनजाति राजस्थान की प्राचीनतम जनजाति है। प्राचीन काल में यही जाति मत्स्य जाति के नाम से जानी जाती थी। जिसका प्रकीण उल्लेख ऋग्वेद, विभिन्न पुराण ग्रंथों बौद्ध और जैन साहित्य में मिलता है। कालांतर में इसी प्रदेश के विभिन्न भागों में विभिन्न नामों से संबोधित की जाती रही ये जनजाति जैसे-मेद, मेव, मेर, मीणा, रावत आदि। मीणा और भील जनजातियों की उत्पत्ति के बारे में अनेक किवदंतियां प्रचलित है। उनमें से अधिकांश तो सर्वथा अविश्वसनीय हैं। इतिहासकार रावत सारस्वत के अनुसार मीणा लोग सिंधु घाटी सभ्यता के प्रोटां द्रविड़ लोग हैं, जिनका गणचिन्ह मछली था। आर्य लोग इन्हें मीन शब्द के पर्याय मत्स्य से संबोधित करते रहे, जबकि ये लोग स्वयं को मीना ही कहते रहे। यहां के आदिवासी ही माने जाते हैं, जो भले ही कभी पुरातन काल में बाहर से आकर बसे हों। इतिहासकारों के अनुसार आर्यों तथा अन्य जातियों के खदेड़े जाने पर ही ये सिंधु घाटी से हटकर अरावली पर्वतमाला में आ बसे, जहां इनके गोत्र आज भी हैं।

उन्ही गोत्रों में एक गोत्र है बेफलावत यह पच्वारा के पांच गोत्रो में प्रमुख है -बेफ्लावातो के राज्य के सम्बन्ध में कोई निचित एतिहासिक प्रमाण तो नहीं मिलते पर इनके बही भातो की बहियों ,एवं जन्सुरुतियो के आधार पर कहा जा सकता है की ये धोला गढ़ (अलवर ) के प्राचीन शासक थे बाद में राज्य विस्तार कर हस्तिनापुर( दिल्ली ) को राजधानी बनाई इनका प्रभाव दिल्ली के आस पास था आदिवासी जनपदीय राज्य स्थापित किया पालनपुर में पाली माता कुलदेवी का स्थान बनाया .... हस्तिनापुर दिल्ली हस्तगत होने पर जैफ और बेफ्लावत योद्धाओ अपने छापामार दल बना लिए और वापिस मूल राज्य की और लोट आये तेजपाल वीर राजा हुवा उसने तिजारा(अलवर ) बसाया यहाँ से जाकर धोन रावत ने धोण बसाया उसके खता राव हुवा जो महान वीर था इसका काल संवत 992 विक्रम माना जाता है | इसने खाटू और खंडेला बसाया तब से इसके वंसज खाटू कलाए इसके पुत्र भोपू रावत (भोबू ).भी अपने समय का बहादुर राजा था पाली माता ने प्रसन्न होकर 750 घोड़े दिए इसने सेनिक दल बनाकर दौसा राज्य की स्थापना की | भोपू के नाम से ही यह वंश (भोप्लावत) बेफ्लावत कहलाया दौसा बडगुजर व कछावाओ दुवार छीन लेने पर पापड्दा बसाया मुगलकाल में कारणों बेफ्लावत पच्वारा का महान वीर हुवा उसको खाटा राव भी कहते है यह पच्वारा के पांच वीरो में से था जिनसे मुग़ल शासक डरते थे इन्होने अकबर से भी उनके इलाके से गुजरने पर बोराई(टेक्स) लिया था | खानू बेफ्लावत ने खानुवास बसाया जिसका बेटा तेजा बड़ा ही वीर था अपनी बहिन उमरादे के बामनवास में भात भरने जाते वक्त लालसोट के चौहानों से झगडा हुवा वापिस आकर चौहानों को मार भगाया युद्ध जीतकर जाते हुए पर पीछे से चौहानों के आकारमान करने पर वीर्गीती प्राप्त की | जिसका smarak खानुवास व लालसोट में बने हुए है

बेफलावत कुलदेवी पाली माता --उक्त photo में ( मलवास नागल )

धराड़ी - जाल वृक्ष

एक जागा कवी ने....लिखा है ..

खाटा राव खलक में मालम ,जालम खेले दाव |

पातसाही दरबार में ,खटके तेजो राव ||

न्याव नगरो बंधियो ,दवाबंध दोरा |

आधो जस सुधारण बेफ्लावत, आधो जस ओऱा ||

कसिपुरे आर कुसलपुरे दिखी , पापड़दे अधिकाई |

हीरो nipje hem को ,लिया रव्वास लड़ताई ||

कंकड़ बज्य घुघरा ,फलसे बज्य ढोल |

ओठो बावड रे खाटू का तेजा , थारो आम्र रह जागो कुल में बोल ||


यह लेख एक आधार है। इसे बढ़ाकर आप मीणा विकिपीडिया की सहायता कर सकते हैं।