प्रभुदयाल हाटवाल

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प्रभुदयाल हाटवाल

स्वतंत्रता के बाद देश में भारत की स्वतंत्र सरकार का गठन हुआ l राजस्थान में रियासती शासन का अन्त हो गया और हीरालाल शास्त्री राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री बनाये गये l जरायमपेशा कानून मीणा जाति के सशक्त आन्दोलन के कारण अगस्त 1946 में विधिवत समाप्त कर दिया गया l

भारत के राष्ट्रपति स्वर्गीय राजेन्द्र बाबू की अध्यक्षता में आदिवासी जनता के विकास के लिए एक आयोग की स्थापना हुई l इसके तत्वावधान में आदिवासी जनजाति एवं पिछड़ी जातियों की सूची प्रसारित की गई l इसमें उदयपुर तथा डूंगरपुर के आदिवासी मीणा तथा भीलों को शामिल कर लिया गया परन्तु जयपुर क्षेत्र के मीणों के विकास के लिए कुछ भी नहीं किया l इस सन्दर्भ में स्वतंत्रता सेनानी लक्ष्मीनारायण झरवाल ने राजस्थान सरकार के समाज कल्याण मंत्री भोगीलाल पाण्ड्या से भेंट की और इस क्षेत्र के विकास के लिए भी धन उपलब्ध कराने की मांग की परन्तु पाण्ड्या ने स्पष्ट कह दिया कि इस क्षेत्र के लिए बजट में कोई प्रावधान नहीं है l तब झरवाल ने निवेदन किया कि यह तो गजब हो गया कि इस क्षेत्र के लाखों मीणा लोग उन्नति से वंचित रह जायेंगे l उन्हें राजा-महाराजाओं ने जरायमपेशा कानून की जंजीरों से जकड़ कर नागरिक अधिकारों से वंचित रखा l तब पाण्ड्या जी ने आश्वासन दिया कि विमुक्त जाति के लिए पैसा है और उनके लिए यहां पर कुछ उद्योग केंद्र खोले जा सकते हैं l जयपुर में विमुक्त जाति छात्रावास खोलने की स्वीकृति भी मिल गई l नवाब साहब की हवेली त्रिपोलिया बाज़ार में छात्रावास खोला गया l

रींगस में मीणा जाति के लिए एक उद्योग केंद्र की स्थापना हुई, जिसमें सिलाई शिक्षा प्रारंभ की गई l इस सिलाई केंद्र के संचालक प्रभुलाल हाटवाल थे l आपने बहुत मनोयोग से इस केंद्र का संचालन किया l इस केंद्र के अतिरिक्त मीणा जाति जागरण कार्यक्रम व सुधार कार्य में भी निरंतर भाग लेते रहे l जयपुर मीणा सुधार समिति के सम्पर्क में आने के बाद आप समाज के अन्धविश्वास एवं कुरीतियों के निवारण के लिए स्वतंत्रता सेनानी लक्ष्मीनारायण झरवाल एवं अन्य प्रबुद्ध सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ जुड़ गए l समाज सुधार के साथ जागीरदार के दमन चक्र के विरुद्ध आपने आवाज उठाई l

आदिवासी मीणा सेवा संघ तहसील शाखा आमेर द्वारा समाज सुधार हेतु आयोजित पदयात्रा इसमें भी आपका सक्रिय योगदान रहा l आदिवासी मीणा समाज में मृत्युभोज आदि में शराबबंदी को रोकने तथा अन्य सामाजिक कुरीतियों को निवारण करने के लिए आमेर तहसील के अनेक ग्रामों के लिए एक पदयात्रा का आयोजन किया गया जो 29 अप्रैल 1976 से 8 मई तक सफलतापूर्वक चलती रही l प्रत्येक क्षेत्र के लगभग 55 से 60 मीणा समाज के लोगों ने इसमें भाग लिया l

संदर्भ