प्रभु दयाल मीणा

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Author of this article is पी एन बैफलावत

श्री प्रभु दयाल मीना का जन्म 7 जुलाई 1974 को एक छोटे से गाँव-पचार खाचरियावास तहसील-दांता रामगढ़ जिला सीकर के गरीब आदिवासी किसान श्री किशन लाल मीना माता श्रीमती चौथी देवी के घर हुवा बचपन से कुशाग्र बुद्धि के धनि श्री प्रभु दयाल जी ने अपनी शिक्षा पूरी कर पर्दे की दुनिया में कदम रखा वैसे पर्दे की दुनिया में जाने का शौक बचपन में गाँवो में होने वाली राम लीला और उसकी नक़ल करने की आदत ने बढाया स्कुल और कालेज लेवल पर काफी रूचि रखते और ड्रामा में हिस्सा लिया करते थे 21 वर्ष की उम्र में मनीषा जी मुलाकात ने सपनों को पूरा करने में अहम् भूमिका निभाई और श्री पंकज बागड़ी जी ने उनको तरसना प्रारंभ किया और धुल के कंकर को हीरे में तब्दील कर दिया फिर वे अपनी कला को निखरने वर्ष 2009 में मुंबई चले गए अब तक इनके सेकड़ो एल्बम आ चुके |

श्री प्रभु जी अभिनेता ,पट कथा लेखक,निर्देशक है | इनकी प्रिसिद्ध फिल्मे है -1- गैल्यो 2- बुढ़ापा की लाठी 3-जादूगर शैय्या 4- सीता-गीता और जगुमगु और 5- रुकमा राजस्थानी (अभिनेत्री-रुकमा के रोल में Aishmita Meena ji )

लेखक व निर्देशक श्री प्रभु दयाल मीणा को यथार्थ फिल्म्स के बैनर के निचे बनी फिल्म रुकमा राजस्थानी ने वांछित सफलता दिलाई और बेस्ट निर्देशन ( Riff "BEST DIRECTOR" AWARD ) का सम्मान दिलाया |

श्री प्रभु दयाल जी का कहना है - मेरे द्वारा निर्देशित राजस्थानी फिल्म "रूकमा राजस्थानी" के लिए Rajasthan international film festival-2016(Riff-2016) मे मुझे "BEST DIRECTOR" का अवार्ड मिला।

फिल्मी केरियर की शुरूआत मे मैने पंकज जी के साथ Actor और Assistant Director के रूप में काम किया।


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