बद्री प्रसाद दुखिया

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बद्री प्रसाद दुखिया

बद्री प्रसाद दुखिया शाहजंहापुर अलवर जिले के मीणों के प्रसिद्ध ग्राम शाहजंहापुर में सन् १९४१ में आपका जन्म हुआ l आपके पिता कालूराम मीणा पुलिस में कांस्टेबल थे l अपने पिता के तीन पुत्रों में आप दुसरे नंबर के थे l आपके पिता ने तीनों पुत्रों को पढाया l आपने प्राइमरी तक शिक्षा प्राप्त की थी l शाहजंहापुर में आर्य समाज की शाखा थी उसमे आप बचपन से जाने लगे l आर्य समाजी नेताओं के सम्पर्क में आने से देश प्रेम की भावना जाग्रत हो गई l

1942 में भारत छोड़ो आन्दोलन चला उस समय आप सतलज काटन मिल्स ऊँकाडा जिला मोंट गुमरी में कार्य करते थे l 1942 में मील में हड़ताल करवाई तथा गिरफ्तार हुए तथा 2 महीने की जेल की सजा हुई l मोंट गुमरी की जेल में २ महीने की सजा काटी l कालांतर में आप मीणा सुधार सभा के संपर्क में आए तथा जुरायम पेशा कानून के खिलाफ आन्दोलन में सक्रिय भाग लेना शुरू किया l आप उर्दू में भजन तथा कविता बनाकर गाँव-गाँव जाकर मीणों में व्याप्त सामाजिक कुरीतियों को दूर करने का आहन करते थे l आपका कार्य क्षेत्र प्रारंभ में शेखावाटी जयपुर रहा फिर आपने सवाई माधोपुर जिले के गंगापुर आंचल को केन्द्र बनाकर सामाजिक सुधार के कार्य किये l सर्वोदय कार्यकर्ता के रूप में गोकुल भाई भट्ट के नेतृत्व में कार्य किया l भूदान ग्रामदान आन्दोलन में बिहार जाकर पद यात्रा की l

पंजाब के मुख्यमंत्री प्रताप सिंह केरो के समय में पंजाब में पंजाबी भाषा अनिवार्य कर दी गई l शाहशाहजहांपुर भी पंजाब में आता था l उस समय आर्य समाज ने हिंदी भाषा आन्दोलन चलाया था l आप उस समय आन्दोलन में गिरफ्तार हुए तथा 6 महीने की जेल की सजा हुई l तीन महीने अम्बाला जेल में सजा काटी तथा तीन महीने करनाल जेल में सजा काटी l शराबबंदी आन्दोलन में भी सक्रिय रूप से भाग लिया तथा शार्दुल सिंह की नाल पर शराब ठेके को बंद करवाने के सम्बन्ध में गिरफ्तार हुए l

सन् 1970 में लालसोट तहसील के मिर्जापुर गाँव में एक मीणा महिला की हत्या हो गई थी l डॉक्टर तथा थानेदार ने रिश्वत लेकर केस को दबा दिया तो हत्यारों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर 15 मार्च 1970 में मुख्यमंत्री के निवास के सामने भूख हड़ताल पर बैठ गये इससे पुलिस को हत्यारों को गिरफ्तार करना पड़ा l सवाई माधोपुर के मेलों में नाचने गाने का रिवाज था इसके खिलाफ तथा नुक्ता प्रथा में फिजूल खर्ची के खिलाफ मीणा समाज में जाग्रति लाने के लिए गाँव-गाँव जाकर क्षेत्र में समाज सुधार का कार्य किया l आप अपने जीवन की अंतिम सांस तक सामाजिक कार्यों में लगे रहे l गंगापुर की मीणा धर्मशाला के लिए चन्दा एकत्र के लिए उस क्षेत्र के ग्रामों का दौरा किया l आप अपने जीवन में निस्वार्थ भाव से समाज सेवा करते रहे l राजनीति से हमेशा दूर रहे l राज माता गायत्री देवी ने बस्सी क्षेत्र से स्वतंत्र पार्टी के टिकट पर विधान सभा का चुनाव लड़ने का प्रस्ताव रखा था तथा चुनाव का खर्चा भी वे उठाने को तैयार थी l बद्री प्रसाद दुखिया निस्वार्थ समाज सेवा को ज्यादा महत्त्व देते थे उन्होंने राज माता का प्रस्ताव ठुकरा दिया था l आप त्याग व तपस्या की साक्षात् मूर्ति थे जीवन भर निस्वार्थ समाज सेवा करते रहेl

संदर्भ