बी पी वर्मा 'पथिक'

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Author of this article is पी एन बैफलावत
बी पी वर्मा 'पथिक'

बी पी पथिक वर्मा


युगों के कष्ट और धरती की पीड़ा को भेद कर बिरले ही लोग इतिहास बनाने में कामयाब होते है अंधकार कितना ही घन हो ..,प्रकाश को कैद नहीं कर सकता ..ठीक उसी प्रकार की शख्शियत का नाम है बीपी वर्मा पथिक आदिवासी समाज के हमदर्द, आदिवासी विचार क्रान्ति के राजस्थान में जन्म दाता, अपने जीवन की सम्पूर्ण पूंजी लगाकर आदिवासी सरोकार मीडिया खड़ा करने वाले , " अरावली उद्‌घोष पत्रिका " के संस्थापक व सम्पादक श्री भवर लाल वर्मा ( बी पी पथिक वर्मा ) जो पथिक बाबा के नाम से लोकप्रिय थे 25 जनवरी 2012 को प्रात: 4 बजे हमको अलविदा कह गये थे । यह आदिवासी साहित्य और समाज की बहुत बड़ी क्षति है जो हम कभी पूरी नही कर पाएगें ।

उनका जन्म 3 जुलाई 1920 को माचेड़ी तहसील टोडाभीम जिला करौली में हुवा पीता जी का नाम श्री पूनम चंद था अतः इनका नाम भवर लाल पूनम वर्मा (बी पी पथिक वर्मा)था जुलाई 1984 को पथिक बाबा लेखाधिकारी के पद से मुंबई में सेवानिवृत होकर भारतीय आदिवासी समाज में विचार क्रांति का जनून पाले इस व्यक्ति ने राजस्थान के मीना और भीलो की जन्म -कर्म स्थली विख्यात आरावली पर्वत के मान को ध्यान में रख वर्स 1986 से आरावली उद्घोस नाम से पत्रिका का संपादन व प्रकाशन प्रारंभ किया .. बाबा आदिवासियों की सेवा करने के लिए आदिवासी एरिया उदयपुर में जाकर बस गए आदिवासियों में जागर्ति लाने के लिए ओर लगातार आरावली उद्घोस पत्रिका का 26 साल से संपादन कर रहे थे इसके लिए किसी से धन की मांग नहीं की मीनो का अन्य आदिवासियों से संवाद बाबा ने ही बनाया अरावली उद्घोष में पथिक बाबा दुवारा लिखे या सम्पादित लेखो /विचारो में आदिवासी दर्शन को कभी भी दया या भीख की श्रेणी में नहीं देखा उन्होंने अपनी कलम से आदिवासी समाज को ललकार कर अपने गौरवशाली इतिहास के पुननिर्माण हेतु प्रेरित किया

पथिक बाबा के नाम से मसहूर इस साहित्यक रत्न की प्रेरणा से साहित्य के क्षेत्र में कई आदिवासी युवाओ ने कलम को ताकत के रूप में प्रयोग करना सीखा इनमे सेवानिवार्त आई जी पी व अखिल भारतीय आदिवासी साहित्य मंच के अध्यक्ष श्री हरी राम मीणा,,व्यंगकार श्री शंकर लाल मीणा (कस्टम कमिश्नर),श्री रमेश मीणा ,श्री सरवन लाल मीणा जनक सिंह जी ,गंगा सहाय मीणा जी , केदार प्रसाद मीणा जी ,श्री चन्दा लाल चकवाला,श्री रमेश बढेरा,श्रीमती यसोदा मीणा,श्री कुलदीप सिंह ,पी एन .बैफलावत और देश के सेकड़ो आदिवासी लेखक प्रतिभाओ का उदय हुवा छतीसगढ़ से प्रकाशित आदिवासी सत्ता के संपादक श्री के आर शाह ने स्वम को पथिक बाबा की साहित्यिक खदान का एक पत्थर घोषित किया है .वे किसी पत्रिका में अपने समाज कार्यो को नहीं छपवाया .राजस्थान की मीणा जाती जिस स्वाभिमान के साथ अपनी समस्याओ और अधिकारों के लिए जूझ रही है और हर क्षेत्र में कामयाबी के झंडे गाड़ रही है उसके पीछे अरावली उद्घोष के माध्यम से फैली पथिक बाबा की ही विचार क्रांति है

शब्द तीर भी होते है और मरहम भी

तीर की तरह चुभ जाते है शब्द

आग लगा देते है क्रांति ला देते है शब्द

शब्द ही विचारो का आइना है

विचारो की तीव्रता उत्तेजना

पैदा करती है शब्दों में

उतेजना प्रेना रूप धर

नवनिर्माण की रखती नीव

पथिक बाबा ने यही किया .....


संदर्भ