बूँदी

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बूँदी का किला

मीणा जाति के बूँदा नामक सरदार ने इस शहर को बसाया संस्थापक के नाम पर ही इसका नाम बूँदी पड़ा। बाद में हाडा शासक राव देवा ने बूँदा को धोखे से हराकर बूँदी पर अपना कब्ज़ा कर लिया फिर इसे अपनी राजधानी बनाया। सन १९४७ में आज़ादी मिलने तक बूँदी एक स्वतंत्र रियासत के रूप में कायम रहा।

बूंदी कोटा के प्राचीन मीणा शासक

बूंदी कोटा के आसपास के क्षेत्र पर ई.पूर्व भी मीना जाति का शासन था।कोटा के रामचंद्रपुरा गाँव से मिले शिलालेख में पहाड़ी मीनाओ और जाटों के मध्य युद्ध का ज़िक्र है।कर्नल जेम्स टाड साहब ने इस शिलालेख को लंदन की ‘एशियाटिक सुसाइटी’ की चित्रशाला में भेज दिया था। उसकी प्रतिलिपि उन्होंने अपने ग्रंथ ‘टाड राजस्थान’ में इस प्रकार दी है-

इस शिलालेख के पढ़ने से कम से कम तीन बातें मालूम होती हैं-

(1) जाट, (जिट या जट) वंश के राजा कार्तिक ने पहाड़ी मीनों से युद्ध किया था यानी इस क्षेत्र पर मीनाओ का शासन था। (2) यशोवर्मा के पुत्र अचल ने इनकी प्रसिद्धि फैलाई। (3) इस वंश के थोत, चन्द्रसेन, कार्तिक, मुकुन्द (मुकुन्द के एक भाई दारुक), कुहुल (दारुक का पुत्र), धनुक आदि ने कई पीढ़ी तक राज्य किया।

पहाड़ी मीना जाति से इनका कब और कहां पर युद्ध हुआ, इसका पता चला लेना अवश्य टेढ़ा काम है। यदि हम यह कहें कि मिनण्डर के साथी मीना लागों से जाट नरेश कार्तिक का युद्ध हुआ, तो मानना पड़ेगा कि वे ईसवी सन् 150 वर्ष पहले बूंदी के आस-पास के प्रदेश पर राज्य कर रहे थे। क्योंकि कई इतिहास लेखकों ने भारत पर मिनण्डर के इस आक्रमण का समय ईसवी पूर्व 155 वर्ष माना है।[1]

मुगलकालीन इतिहासकार मुहणोत नेणसी ने अपनी ख्यात में लिखा हैं की देवा हाड़ा भैंसरोड (भैंसरोड़गढ़) नामक स्थान पर रहता था | सन 1384 ईस्वी में उसारा गोत्र के मीना राजा बूंदा को धोखे से मार कर देवा ने हाडा वंश की नीव रखी थी । तब नैनवा और टोंक पर जाट राजा बल्लन दहिया का राज्य था जो भीम सिंह का पोत्र था। यह बल्लन दहिया बूंदी राजा बूंदा मीना उसारा का मित्र था। मीणा राजा बूंदा बड़ा वीर था। लेकिन जब धोखे से बूंदा मीणा की हत्या की गई थी इस समय बल्लन दहिया ने अपने जाट और मीना सहयोगी के साथ लेकर देवा हाड़ा से युद्ध किया वंश भास्कर के अनुसार देवा हाडा और बल्लन के मध्य युद्ध हुआ बल्लन दहिया इस युद्ध में देवा हाडा से युद्ध करते हुए अपने परिवार सहित मारा गया |

आज भी इस क्षेत्र में दहिया जाट 30 से ज्यादा गाम में निवास करते है।यह सभी दहिया जाट राजा भीम सिंह दहिया के वंशज है[2]


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