बैनाडा

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Author of this article is Aassuu Meena

बैनाड़/बैनाड़ा/बैनाड़े राजस्थान व सम्‍पूर्ण भारत में जमींदार मीणा वर्ग का एक एतिहासिक पहचान रखने वाला गोत्र है।

Origin

जनश्रुतियों व बैनाड़/बैनाड़ा/बैनाड़े गोत्र के जागा के अनुसार इस गोत्र के निकास स्थान जयपुर जिले की आमेर तहसील के नींदड़-बैनाड़-छापराड़ी-सीस्यावास आदि गाँव माने गये हैं जो वर्तमान में भी मुख्यतः इसी गोत्र के निवासित गाँव है तथा यहाँ बैनाड़/बैनाड़ा/बैनाड़े गोत्र के ज्ञात पूर्वज "श्री लावा बैनाड़ा" का मंदिर भी है।

जयपुर के नींदड़-बैनाड़-छापराड़ी-सीस्यावास, आमेर व जमवारामगढ क्षेत्र इस गोत्र के प्राचीन निवासित क्षेत्र रहे हैं तथा भारत व मुख्यतः राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों में पाये जाने वाले बैनाड़/बैनाड़ा/बैनाड़े गोत्र के लोग इसी क्षेत्र से निकले हुए हैं अथार्त् उनके पूर्वज इसी क्षेत्र के हैं।

History

मत्स्य प्रदेश (राजस्थान) के प्राचीन शासक मीणा आदिवासी थे, अम्‍बर(आमेर)जयपुर पर कई मीणा वंशो का राजपूतो के राजस्थान मे आने से पूर्व राज था उनमें पन्ना मीणा एक महान और वीर योध्दा था उसकी वीरता की स्मृति मे यहां विशाल एतिहासिक पन्‍ना मीणा कुण्ड (बावड़ी) बनवाया गया था जो आज भी मीणों के गौरवशाली इतिहास की याद दिलाता है । यह कुण्ड बैनाड़ा गोत्र के आदिवासी पन्ना मीणा की स्मृति मेँ बनाया गया है । रावत सारस्वत द्वारा लिखित मीणा इतिहास नामक पुस्तक के पृष्ठ 170 पर बैनाड़ा वंश की वंशावली दे रखी है उसके अनुसार राव सूरो नामक राजा इनका पूर्वज था जिनका शासन समरावती नगरी (वर्तमान सांभर) मे चौहानों से पूर्व शासन था उसके वंशज राव बीनो जी ने समरावती नगरी से आकर आमेर के उत्तर पश्चिम मे एक जगह पर संवत 112 मे गढ़ कोट बनाकर राज्य स्थापित किया । बाद के किसी शासक द्वारा राज्य की रक्षा मे दुश्मनो से युध्द करते गर्दन कट जाने के बाद भी युध्द मे डटे रहकर जीत हासिल की गई जहां गर्दन गिरी उस स्थान का नाम नींदड़ (बिना धड़ वाला) और जहां शेष धड़ यानि बिना नाड़(गर्दन) का गिरा उस स्थान का नाम बैनाड़(बिना गर्दन का) प्रचलीत हुआ अतः इस बैनाड़ स्थान के नाम से इस वंश का नाम बैनाड़ा(बैदाँड़ा/बैनाड़/बैनाड़े) नामकरण हुआ । बाद मे राहुमीर,नानु एवं पन्ना हुए इस वंश मे पन्ना मीणा एक प्रसिध्द शासक हुआ जिनकी स्मृति मे आमेर की पहाड़ियो मे पन्ना मीणा कुण्ड बनाया गया जो स्थापत्य कला का एक बेजोड़ नमूना है जो मीणा शासको की पाचवीं सदी मे बनी आभानेरी बावड़ी जैसा ही है । मीणा पन्ना के राव धूड़ (राव थूल,राव दूहड़,राव धूल) पैदा हूए जो महान वीर और योध्दा थे उनकी दो शादी हुई पहली बासणा के राव सातल बासणवाल की लड़की से हूई जिसके 12 लड़के हुए दूसरी जोड़मोड़ के भोम सिँह बनजारा को युध्द मे हराकर उसकी लड़की वीराँ बणजारी से कि जिसके 5 लड़के हूए ।

पन्ना जी, धुड़ जी के द्वारा विभिन्न युध्दो मे दिखाई अद्भूत वीरता को देखकर एक लोक कवि ने इस वंश की वीरता का बखान अन्य मीणा वंशो के साथ कुछ इस प्रकार किया है - " सोगण सिंह सपूत है, पाहट है पकड़ेत। बैनाड़ा(बैन्दाड़ा) भड़ बंक है सदा जंग मे जीत॥"

एक जनश्रुति है कि राव धुड़ के एक लड़की पैदा हुई उसका डोला भोमसिँह बणजारा ने मांगा, न देने पर युध्द ठन गया, युध्द की शर्त रखी गई जो जितेगा उसको अपनी लड़की देनी होगी युध्द आसोज्या माता के तालाब के किनारे हुआ युध्द मे राव धूड़ मीणा जीत गया, शर्त के मुताबिक भोमसिंह बनजारा की लड़की भूरी (वीराँ) के साथ हुई तब से राव धुड़ ने आसोज्या(आसोजाई,चँड माता) माता चतरपुरा (सांभर,जयपुर) को अपनी कुल देवी माना ।


राव धूड़ से संवत 1146 में पजवण कच्छावा ने धोखे से राज्य छीना । राव धुड़ की प्रथम पत्नि के 12 बेटो ने 12 खेड़े (गांव) स्थापित किये । खरु ने खरवाड़ी,पूरा ने चौप बिलोयी, लावा ने कोटड़ा व छापराड़ी, श्याला ने सालबड़ा, टोडू ने टोडा, कालू(कालक देव) ने कालवाड़, चुँपा ने चौप, बलदेव ने बिलौची,सावा ने सायवाड़ व मंगला ने सिस्यावास जो जिसका नाम अपने पुत्र सहस मल के नाम पर रखा तथा द्वितीय पत्‍नी के 5 पुत्रो ने क्रमश: 5 गांव बसाये - 1. दासो ने कुंडल बसाया 2. धानो ने भांवता बसाया 3. हरराय ने भांवती बसाया 4. कररो ने देलाडी बसाया 5. भावत ने द्वारापुरा बसाया । बैनाड़ो की राजधानिया बदलती रही - सबसे पहले समरावती नगरी(सांभर),रही इसके बाद नींदड़-बैनाड़ फिर सालबड़ा इसके बाद सडवा व अन्त मे सिस्यावास जो पन्ना मीणा कुण्ड से 3 किलोमीटर आमेर की अरावली पर्वत श्रृखँलाओ मे स्थित है जिसके चारो और परकोटा बना है और जयपुर की तरह बड़े बड़े गेट भी लगे है ।

लावा बैनाड़ा भी इस वंश एक प्रसिध्द योध्दा रहा है जिसने कई युध्द जीते थे पर मतवाल (शाही अंदाज मे शराब सेवन) मे अधिक प्रसिध्द रहा । एक कवि ने कहा है-

" बादा जी बारा पीवै,पूरण पीवै पचास, । लावो मूंको बैनाड़ को, पीवै सौ सौ मण का पास ॥" लावा वीर तो था ही बड़ा दानी भी था । उन्होने कोटड़ा गांव मे एक तलाई बनाई जिसका नाम रखा पारकी तलाई । किसी बादशाह के समय उनकी दान वीरता का परिक्षण भी हुआ जिसमे वे खरे उतरे । उनकी शादी पूट का बास गांव के खोड़ा गौत्र की लड़की से हई थी, इन्‍होंने अपने जीवन में कई युध्द लड़े और जीते पर इनकि दानवीरता से ये पूजनीय हो गये ।

कुल देवी :- आशोजाई माता, सांभर (जयपुर) परन्‍तु वर्तमान में जयपुर व उसके आसपास के क्षेत्र के बैनाड़ा वंश के लोग ही आशोजाई माता, सांभर, जयपुर को अपनी कुल देवी के रूप में पूजते है तथा दौसा व उसके आसपास के क्षेत्र के बैनाड़ा वंश के लोग पपलाज माता, लालसोट, दौसा को अपनी कुल देवी के रूप में पूजते हैं। धराड़ी कुल वृक्ष :- खेजड़ा/पीपल।

Population

Distribution

वर्तमान में बैनाड़/बैनाड़ा/बैनाड़े गोत्र के मुख्य क्षेत्र व गाँव :- दौसा के बांदीकुई क्षेत्र में - भाँवता-भाँवती, जगसोली, फुलेला, बसवा, बड़ियाल,देलाड़ी-द्वारपुरा, धनावड़-भोजवाड़ा जयपुर के शहरी क्षेत्र व आमेर, जमवारामगढ़, बस्सी,सांगानेर क्षेत्र में - सूरजपोल, घाटगेट, पुराना जयपुर क्षेत्र,आमेर, छापराड़ी, भाट्या, नींदड़-बैनाड़, बैनाड़ा, बस्सी, जमवारामगढ़, पालड़ी मीणा, खोहरा मीणा, टोड़ा-बीलोत, चैनपुरा, जामडोली व सांभर अलवर के राजगढ़-लक्ष्मणगढ़ क्षेत्र में - सकट-राजपुर, जामडोली गुवाड़ा करौली के टोड़ाभीम क्षेत्र में - मखटोट,दादनपुर, नाहरखोहरा तथा सवाईमाधोपुर, बूंदी के नैनवां, टोंक के लावा, अजमेर के कुछ क्षेत्रों में बैनाड़/बैनाड़ गोत्र की बहुलता है। नोट - और राज्य से बाहर उत्तर प्रदेश के मेरठ क्षेत्र में और महाराष्ट्र के औरंगाबाद-जलगांव क्षेत्र में निवास करने वाला मीणा समाज मुख्यतः बैनाड़/बैनाड़ा/बैनाड़े गोत्र का ही है।

Notable persons

1. जगदीश नारायण मीणा बैनाड़ा - वर्तमान विधायक जम्‍वारामगढ, जयपुर 2. गोपाल मीणा बैनाड़ा - पूर्व विधायक जम्‍ावारामगढ, जयपुर 3. लक्ष्‍मीनारायण मीणा बैनाड़ - पूर्व सरपंच एवं समाजसेवी, ग्राम पंचायत भाँवता-भाँवती, बांदीकुई, दौसा 4. पूरणमल मीणा बैनाड़ - पूर्व प्रधान, पंचायत समिति बांदीकुई, दौसा 5. प्रेम देवी मीणा बैनाड़ - पूर्व प्रधान, पंचायत समिति बांदीकुई, दौसा 6. दौलतराम मीणा बैनाड़ - वर्तमान पंचायत समिति सदस्‍य, पंचायत समिति बांदीकुई, दौसा 7. रामहेत मीणा बैनाड़ - सेवानिवृत अनुभाग अधिकारी, शासन सचिवालय जयपुर एवं समाजसेवी, भाँवता-भाँवती, बांदीकुई, दौसा 8. आशु मीणा बैनाड़ - बैनाड़ा गोत्र के जानकार एवं बैनाड़ा गोत्र के इस पेज के लेखक, For Contact and Information Please Visit :- http://fb.com/aassuu.meena

References

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