भैंरूलाल कालाबादल

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भैंरूलाल कालाबादल

देश व समाज के लिए समर्पित भैरव लाल काला बादल (कोटा) आपका देश सेवा एवं स्वतंत्रता सेनानियों में मीणा समाज के अनेक व्यक्ति अपना विशेष स्थान रखते हैं l इनमें भैरवलाल काला बादल का नाम विशेष उल्लेखनीय है l हाड़ौती अंचल में तत्कालीन कोटा रियासत की छीपा बड़ोद तहसील के ककोड़ी खेडा के जंगलों में जन्मे भैरवलाल ने खानपुर से मिडिल तक शिक्षा प्राप्त की l उनके बाद वे अध्ययन के लिए बाराँ आए l वहाँ पंडित नयनूराम शर्मा व हरिभाई किंकर के साथ प्रजामण्डल का प्रचार करने आये थे l स्वतंत्रता सेनानी होने के कारण उन्हें पुलिस थानों में हाजरी देनी पड़ती थी l बाराँ में अन्य छात्रों के साथ भैरव लाल जी नयनूराम से भेंट करने लगे l प्रथम साक्षात्कार में ही भैरवलाल में देश भक्ति की ऐसी लौ लगी कि वे पढ़ाई छोड़कर स्वतंत्रता आन्दोलन में कूद पड़े l प्रारंभ में किशोर स्वतंत्रता सेनानी भैरवलाल अपनी सुरीली आवाज में नयनूराम द्वारा रचित देश प्रेम के गीत गाया करते थे l बाद में स्वयं भी देश भक्ति पूर्ण गीतों की रचना करने लगे जो आगे चलकर बहुत लोकप्रिय हुये l

तत्कालीन शासन के विरुद्ध ओजस्वी गीतों के कारण आपको पुलिस ने पकड़ लिया और बुरी तरह से पीटा, परन्तु इससे उनके उत्साह में व देश-प्रेम में कोई कमी नहीं आई l अन्त में पुलिस पिटाई तथा ब्रिटिश सरकार के गिरफ़्तारी वारंट से तंग आकर यह युवक हाड़ौती से फरार हो गया और निरंतर 1937 से 18 वर्ष तक अपने परिवार से दूर नीम का थाना, जयपुर और शेखावाटी के क्षेत्र में आजादी के गीत गाते रहे l इनको काला बादल नाम से संबोधित किये जाने की भी अपनी कहानी है l 1946 में पंडित जवाहर लाल नेहरु की अध्यक्षता में उदयपुर में देशी राज्य लोक परिषद् का सम्मलेन हुआ था l सम्मलेन में पंडित जी की सुरक्षा के लिए बीस स्वयं सेवकों को नियुक्त किया गया जिनमें एक भैरवलाल बादल भी थे l

सम्मलेन के दूसरे दिन नेहरु जी प्रातः तीन बजे विश्राम करने पहुंचे l उस समय भैरवलाल मुख्य द्वार पर पहरा दे रहे थे l नेहरु जी ने विश्राम कक्ष में प्रवेश किया और भैरवलाल नींद से बचने के लिए गीत गाने लगे l यद्यपि गीत हाड़ौती भाषा में था, परन्तु गीत के बोल पंडित जी समझ गए l अतः उन्होंने सहयोगियों मृदुला बेन आदि को गायक को बुलाने का निर्देश दिया l भैरवलाल को नेहरु जी के सामने उपस्थित किया गया l भैरवलाल सहमे से रह गये, संभवतया नींद में बाधा पड़ने के कारण पंडित जी ने उसे बुलाया हो l परन्तु बात ऐसी नहीं थी l नेहरु जी गीत के बोल से इतने प्रभावित हुए कि उसको पुनः सुनने के लिए भैरवलाल को बुलाया था l नेहरु जी गीत की भावना से अत्यन्त प्रभावित हुये l

संदर्भ