भौमाराम मीणा

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भौमाराम मीणा

आपका आपका जन्म थौलाई ग्राम तहसील जमवारामगढ़ में हुआ l मीणा सुधार समिति के मंत्री तथा स्वतंत्रता सेनानी लक्ष्मीनारायण झरवाल ने समाज सुधार तथा नागरिक अधिकारों के लिए संघर्ष प्रारंभ किया तब भौमाराम ने झरवाल के नेतृत्व में मीणा समाज में सुधार तथा जरायम पेशा कानून के विरुद्ध जन आन्दोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया l

उन्हीं दिनों जयपुर राज्य प्रजामंडल द्वारा उत्तरदायी शासन प्राप्त करने के लिए आन्दोलन चलाया जा रहा था तो श्री भौमाराम भी अपने राजनीतिक गुरु झरवाल के साथ इस आन्दोलन में भाग लेने लगे l यहां यह कहना भी अनुचित नहीं होगा कि मीणा सामाज ने देश की स्वतंत्रता के लिए आयोजित आन्दोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई l स्वर्ण जाति के नेता इने-गिने ही थे l वास्तव शक्ति तो जनता की थी, जिसमें मीणा समाज की संख्या सबसे अधिक थी l

भौमाराम की महत्वपूर्ण उपलब्धि थौलाई में आयोजित मीणा सम्मलेन को सफल बनाना है l आपने इसमें तन-मन-धन से सहयोग दिया जो बहुत ही सराहनीय है l इतना ही नहीं बडवा में आयोजित विराट सम्मलेन जिसमें जयपुर, अलवर, भरतपुर तथा टोंक के मीणा बंधुओं ने बहुत ही उत्साह से भाग लिया था, उसको सार्थक एवं सफल बनाने में भौमाराम ने रात-दिन एक कर दिया l

मीणा जन आन्दोलन को व्यापक एवं शक्तिशाली बनाने के लिए आपने कार्यकर्ताओं के एक दल का गठन किया, जिसमें नारायण, मानुताल खवा रानी, रघुनाथ पबडी थौलाई, रामजीवन जेफ थौलाई, गणेश कल्याण बूज जेफ मैड, महादेव जेफ, श्यामपुरा आदि के नाम विशेष उल्लेखनीय हैं l यों तो इस दल में अनेक लोग थे l

मीणा सुधार समिति का मुख्य कार्य तो जरायम पेशा कानून हटवाकर नागरिक अधिकार प्राप्त करना था, परन्तु उसने यह अनुभव किया की जब तक हम नहीं सुधरेंगे तब इन अधिकारों का प्राप्त कर लेना भी हमारे लिए अधिक उपयोगी नहीं होगा l समाज में व्यापत बुराइयाँ, अश्लील नाच-गान को समाप्त किया जायेगा l शिक्षा का प्रसार आवश्यक समझ कर मीणा बालक-बालिकाओं को विद्यालय में प्रवेश दिलाने का एक अभियान चलाया गया l कुछ भटके हुए लोगों द्वारा किए गए चौरी-चकारी के काम को राजकीय पुलिस विभाग समाप्त नहीं कर पा रहा था l अत: ऐसे भटके हुए लोगों को उचित रास्ते में लाने तथा सभ्य नागरिक बनाने का बीड़ा भी मीणा सुधार समिति ने उठाया, जिसका विस्तृत विवरण एक स्वतंत्र अध्याय में हम पिछले पृष्ठों में पढ़ चुके हैं l

भौमाराम ने अपने राजनीतिक गुरु लक्ष्मीनारायण झरवाल के नेतृत्व में सत्याग्रह आन्दोलन में उत्साह से भाग लिया l मद्यपान व अन्य सामाजिक बुराइयों को दूर करने के लिए सुधार दल दोषी व्यक्ति के घर जाकर धरना देता था, जब तक दोषी व्यक्ति अपने अपराध स्वीकार कर प्रतिज्ञा पत्र पर हस्ताक्षर नहीं कर देता था, तब तक सत्याग्रही जत्था अपराधी के घर पर ही धरना देता रहता था l इसके अतिरिक्त ज्यादा हठी अपराधी जो आसानी से अपराध स्वीकार नहीं करते थे, उनका काला मुँह करके गधे पर बैठाकर गाँव में घुमाया जाता था ताकि अन्य लोग इससे शिक्षा ले सके l

पुलिस के अत्याचारों का भी सत्याग्रह आन्दोलन द्वारा विरोध किया गया l अनेक चोरियों का पुलिस पता नहीं लगा पा रही थी तो इस सत्याग्रह दल ने चोरियां पकड़ी और चोरी गए माल को उसके स्वामी को पुनः दिलवाया l इससे पुलिस के बड़े अधिकारी भी मीणा सुधार समिति के कार्यों की प्रशंसा करने लगे l लक्ष्मीनारायण झरवाल का सत्याग्रह आन्दोलन पूरी तरह अहिंसात्मक था l भौमाराम का इस कार्य में सहयोग रहा l इस सत्याग्रह आन्दोलन की सफलता को देखकर गाँव-गाँव में झरवाल को मीणा जाति का गाँधी कहा जाने लगा l

संदर्भ