रघुनाथ पबडी

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रघुनाथ पबडी

श्री रघुनाथ पबडी (1903 - 1996) मीणा जाति पर जरायमपेशा कानून के अन्तर्गत आवाज उठाने में आप सर्वदा सचेष्ट रहे l आपका जन्म 1903 ग्राम थौली तहसील जमवारामगढ़ जिला जयपुर में हुआ l आपके पिता का नाम झूथाराम मीणा था l प्रारंभिक शिक्षा अपने स्तर पर जोशी जी की पाठशाला में प्राप्त की l इसके बाद आपकी नियुक्ति रामगढ़ बांध पर निर्मित, स्वर्गीय महाराजा मानसिंह के महलों में फरास के पद पर की गई l वहां महाराजा साहब का आना-जाना समय-समय पर बराबर बना रहता था l समय मिलने पर आप महाराजा से निवेदन करते, “अन्नदाता 1930 से जरायमपेशा कानून लागू होने से लाखों निर्दोष मीणा लोग बहुत दुःखी हैं l हजूर आप विचार करने की कृपा करें कि मीणा जाति में जन्म लेने मात्र से क्या कोई अपराधी हो सकता है l अतः मेरा निवेदन है कि आप इस अन्यायपूर्ण कानून को तुरंत निरस्त करने की कृपा करें l”

दूसरी और इन्होने श्री लक्ष्मीनारायण झरवाल, के साथ मिलकर थौलाई, खवारानी, बुज, खराणा, आंधी में सभायें कर मीणा जाति में जाग्रति लाने तथा जरायमपेशा कानून के विरुद्ध जनमत जाग्रत करने के लिए अनेक सभायें कीं l श्री झरवाल के साथ आप प्रजामंडल के आन्दोलन में भी भाग लेने लगे, क्योंकि उस समय प्रजामंडल ने भी नागरिक अधिकारों की प्राप्ति के लिए आन्दोलन चला रखा था l अतः आपने अपनी 30 वर्ष की राजकीय सेवा को तिलांजलि देकर श्री झरवाल के अनुयायी बन गए और सन् 1942 से राजनीति में सक्रिय रूप से भाग लेने लगे l जयपुर, टोंक, झुंझुनू, नीमकाथाना, दौसा, लालसोट, बांदीकुई आदि क्षेत्र में मीणा सत्याग्रह आन्दोलन में सक्रिय रूप से भाग लेना प्रारम्भ कर दिया था l अन्त में मीणा जाति के जन आन्दोलन को सफलता मिली और विवश होकर जयपुर राज्य सरकार ने 10 अगस्त, 1946 को इस काले कानून को विधिवत समाप्त कर दिया और गजट में आज्ञा प्रसारित कर दी l मीणा जाति को पूर्ण रूप से सम्पूर्ण नागरिक अधिकार दे दिये गये l

परन्तु पुलिस अधिकारी व राज्य के उच्च पद पर आसीन यह कभी नहीं चाहते थे कि मीणा जाति उन्नति करके आगे बढ़े l अतः उन्होंने राज्य सरकार द्वारा प्रसारित गजट की आज्ञा भंग करके अपनी और से एम.पास जारी करना प्रारंभ कर दिया, इसके अनुसार इन पासधारियों को ही कुछ सुविधा भी मिलती थी l शेष पर पहले जैसे प्रतिबंध थे l इसके अतिरिक्त दफा 28 अन्तर्गत मीणा जाति पर यह प्रतिबंध भी लगा दिया गया कि ऊंट आदि सवारी रखने पर भी रोक लगा दी l इस अन्याय के विरोध में स्वतंत्रता सेनानी श्री झरवाल के साथ मिलकर डटकर विरोध किया और गाँव-गाँव घूमकर सभायें की और इसके विरोध में जनमत तैयार किया l 5 जून, 1947 को जयपुर नगर में त्रिपोलिया बाजार, किशनपोल, अजमेरी गेट, न्यू गेट होता हुआ जौहरी बाजार में देवडी जी के मंदिर के पास विशाल सभा की और काले कानून के अन्तर्गत विशाल प्रदर्शन के साथ स्वतंत्रता सेनानी झरवाल ने एम.पास की होली जलाकर इसे हमेशा के लिए भस्मीभूत कर दिया l

इसके अतिरिक्त मीणा जाति में असामाजिक प्रवृतियो को रोकने के लिए श्री झरवाल के साथ मिलकर सत्याग्रह जत्थे तैयार किये l और असामाजिक झगड़ों को निपटाने के लिए स्थान-स्थान पर न्याय पंचायतें बनाई गई l उनमें भी श्री रघुनाथ का महत्वपूर्ण योगदान रहा l रचनात्मक कार्यों में आप श्री झरवाल के साथ सदा सक्रिय रहे l छात्रावास निर्माण योजना में आपका पूरा सहयोग रहा l मीणा जाति को अनुसूचित जनजाति सूची में लाने तथा उनके लिए आरक्षण के लिए वे सदा संघर्ष करते रहे l

ऐसे कर्म-वीर जाति शुभचिंतक सेवाभावी श्री रघुनाथ पबडी का स्वर्गवास २३ जून, १९९६ को अपने गाँव थौलाई में हो गया l परन्तु आज जो मीणा जाति उन्नति की और अग्रसर हो रही है, यह मीणा जाति के त्यागमय जीवन का ही प्रतिफल है l रघुनाथ जी पबडी के प्रमुख सहयोगी भौमाराम जेफ, रामजीवन जेफ थौलाई, नारायण माणुताल, कजोड पटेल, कल्याण झरवाल बूज आदि का सहयोग रहा l

संदर्भ