सुनाम

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Author of this article is पी एन बैफलावत

सुनाम कस्बा


चाणक्य ने मोर्यकाल में आटविक लोगो को मौर्य सेना में भर्ती किये थे उसकी नीति थी की आदिवासियो को नाराज नही करना चाहिए इनके किले मजबूत होते है ये घनी आबादि मे बसे होते है नीडर बहादूर होते है, दिन दहाड़े युध्द के लिए तत्पर रहते है ये भारी हानी पहुचा सकते है इनको दुश्मनो से लड़ने में काम लेना चाहिए । उनको सेवा के बदले उपज का कुछ हिस्सा देना चाहिए ।

वर्तमान हनुमानगढ़ के सुनाम कस्बे में मीनाओं के आबाद होने का उल्लेख आया है कि सुल्तान मोहम्मद तुगलक ने सुनाम व समाना के विद्रोही जाट व मीनाओ के संगठन ' मण्डल ' को नष्ट करके मुखियाओ को दिल्ली ले जाकर मुसलमान बना दिया ( E.H.I, इलियट भाग- 3, पार्ट- 1 पेज 245 ) इसी पुस्तक में अबोहर में मीनाओ के होने का उल्लेख है (पे 275 बही) इससे स्पष्ट है कि मीना प्राचीनकाल से सरस्वती के अपत्यकाओ में गंगा नगर हनुमानगढ़ एवं अबोहर- फाजिल्का मे आबाद थे । हनुमानगढ़ के सुनाम कस्बे में मीनाओं के आबाद होने का उल्लेख आया है । हरियाणा के फतेहाबाद जिले में जाँड वाला शोतर गाँव में मीणा के कम से कम 1000 वोट आज भी है उनका गोत्र कागन्स है | ऐसा कोई क्षेत्र न था जो मिनाओ के अधीन न रहा हो | सिंगली सारसोप गाँव सवाई मदोपुर में भी कांगस गोत्र के मीणा लोगो का रुतबा और दबदबा था |

कर्नल टॉड की पुस्तक के पृष्ठ-507-520तक उल्लेख है की उदयपुरवाटी सीकर के पास कासरग्ढ़ दुर्ग था जगाओ की पोथी से तथ्य सामने आते है की कांगस,कान्सरवाल गोत्र के मिनाओ की प्राचीन राजधानी थी ..उदयपुरवाटी का प्राचीन नाम कुसुम्बी अथवा काईस था इसके अंतर्गत चार भागों में विभक्त 45 गाँव थे वही छापोलीगढ़ भी था जो छापोला गोत्र के मिनाओ की राजधानी था यह क्षेत्र चौहानों और तोमरो ने मीणा आदिवासियों से धोके से छिना आमेर के राजा उदयकरण पड़पोते बालो जी ने 15 वी सदी में यह क्षेत्र अपने अधिकार में किया देवासी तथा कांसली (कासरग्ढ़) कुछ समय चंदेलो के अधीन भी रहे शेखा जी के पुत्र रायमल की सेवा से खुश होकर अकबर ने देवासी तथा कांसली के नगरो का अधिकार दिया रायमल के बाद कांसली और 84 गाँव उनके पुत्र तिरमल राव को मिले जयसिंग के समय सुजान सिंह छापोली गढ़ और दीप सिंह कांसली के सरदार बने चाँद सिंह सीकर के जागीरदार बने उनके देवी सिंह हुए उन्होंने लक्ष्मण सिंह को गोद लिया लक्ष्मण सिंह ने अधीनस्थ को निर्मल बना दिया उनके दुर्गो को भूमिसात कर दिया जिनमे कासली और छापोली गढ़ प्रमुख थे | इन गढ़ों के भूमिसात होते ही मीणा इतिहास के ऐतिहासिक साक्ष्य भी नष्ट हो गए | ये छोटे छोटे आटविक राज्य थे |

महाभारत के काल का मत्स्य संघ की प्रशासनिक व्यवस्था लौकतान्त्रिक थी जो मौर्यकाल में छिन्न- भिन्न हो गयी और इनके छोटे-छोटे गण ही आटविक (मेवासा ) राज्य बन गये । चन्द्रगुप्त मोर्य के पिता इनमे से ही थे । समुद्रगुप्त की इलाहाबाद की प्रशस्ति मे आटविक (आदिवासी मेवासे ) को विजित करने का उल्लेख मिलता है राजस्थान व गुजरात के आटविक राज्य मीना और भीलो के ही थे इस प्रकार वर्तमान ढूंढाड़ प्रदेश के मीना राज्य इसी प्रकार के विकसित आटविक राज्य थे ।

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