हरसहाय जैफ

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जब-जब देश पर संकट आता है, तब-तब जन कल्याण के लिए महापुरुषों को भगवन अवतारित करते हैं l मीणा समाज के निर्दोष देशभक्तों को अंग्रेज सरकार और राजा महाराजाओं ने काले कानून में फंसा कर उन पर अमानवीय जुल्मों का कहर ढाया l उसके विरोध के लिए श्री हरसहाय जी जैफ पुत्र फत्थाराम ग्राम मांवड़ा से नीम का थाना आये l कुछ समय पश्चात् नीम का थाना से नयाबास से कुछ दूरी पर जाकर बस गए l

अंग्रेज पुलिस अधिकारी यंग साहब आई.जी.पी. पुलिस ने मीणा जाति पर क्रीमिनल ट्राइब एक्ट १९३० को थोपकर मीणाओं पर और अधिक से अधिक पुलिस के अन्याय शुरू कर दिए l जिससे तोरावाटी, शेखावाटी में त्राहि-त्राहि मच गई l दिनांक १६-१७-१८ अप्रैल १९४४ में नीम का थाना में श्री हरसहाय जी जैफ के संयोजन में एक विशाल मीणा सम्मलेन का आयोजन किया गया l सम्मलेन का उद्घाटन सम्पादक हिन्दुस्तान समाचार पत्र दिल्ली श्री विधालंकर ने किया और अध्यक्षता मीणा जाति के मुनि मगन सागर जी ने की l उद्घाटन भाषण में श्री विधालंकर ने बताया की मीणा जाति एक बहादुर कोम होने पर भी पुलिस के खूनी पंजे में फंसाकर अधखिली कली की तरह मसोस दिया गया है l केन्द्रीय व राज्य सरकार अनुचित कदम उठाने वालों का पूर्ण रूप से साथ दे रही है जो गलत है l उन्होंने मीणा जाति को शिक्षित बनाकर योग्य नागरिक बनाया जाये ताकि नवनिर्मित भारत के विकास में पूर्ण रूप से भागीदार बन सके l

श्री लक्ष्मीनारायण झरवाल मंत्री मीणा सुधार समिति के तत्वाधान में आयोजित सभाओं में और अन्य जाति सुधार कार्यों में श्री हरसहाय जी जैफ ने तन-मन-धन से हिस्सा लेकर आख़िरी साँस तक अपना योगदान देते रहे l श्री हरसहाय जी जैफ ने सन् १९४५ में नयाबास में शिक्षा के लिए पाठशाला के संचालन का आयोजन अपने हाथ में लिया तथा समय-समय पर जिला सीकर श्रेत्र में असामाजिक कार्यों को त्यागने हेतु सभाओं का सुचारू रूप से आयोजन किया l आपने इस योगदान को मीणा जाति की पीढ़ी कभी नहीं भुला सकेगी l

संदर्भ