हरिराम मीणा

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श्री हरिराम मीणा

जन्म: 01 मई 1952, जन्म स्थान ग्राम वामनवास, ज़िला सवाई माधोपुर, राजस्थान

श्री हरि राम मीणा सेवा निवृत आईजीपी पुलिस एवं साहित्यकार का योगदान भुलाया नहीं जा सकता हरी राम जी छायावादी कवि है 1990 से काव्य सृजन पुनः आरम्भ किया इनकी कविताये विभिन्न पत्र पत्रिकाओ के माध्यम से जनता के समक्ष आने लगी | 'हाँ चाँद मेरा है' नमक कविता संकलन पर तो हरि राम जी को २३ अगस्त २००३ को साहित्य का मीरा पुरष्कार मिला | कविता संकलन रोया नहीं था यक्ष 2003 में प्रकाशित हुवा 7 वे विश्व हिंदी सम्मलेन में भाग लिया | साइबर सिटी से नंगे आदिवासियों तक पुस्तक लिखी | इनका दूसरा काव्य संग्रह मेघदूत के पत्रों यक्ष व कुबेर के मिथकों प्रशन उत्तरों की आदुनिक व्याख्या की | इसी कर्म में करीब दो दर्जन आलेख आधा दर्जन पुस्तक समीक्षाए ,कुछ कहानिया व यात्रा वृतांत सामिल है हरी राम जी को अब तक उल्लेखनीय साहित्यक सेवा के लिए डा . आम्बेडकर रास्ट्रीय पुरस्कार वर्ष 2002 ,राजस्थान साहित्य अकादमी का सर्वोच्च वर्ष 2003 ,रास्ट्र भाषा हिंदी समिति दुन्गार्गढ़ दुवारा साहित्य श्री वर्ष 2005 ,पंचाला सिद्धा फौन्ड़ेसन दुवारा साहित्य पुरष्कार वर्ष 2007 और इन सम्मानों में चार चाद लगाने वाला केंद्रीय हिंदी संसथान दुवारा महापंडित राहुल संकृत्यायन पुरष्कार से सम्मानित किया गया |....उन्होंने पुलिस सेवा के साथ आदिवासियों को साहित्य और इतिहास में जगह दिलाने के लिए 15 साल तक घूम घूम कर इतिहासिक घटनाओ के तथ्य जुटाए,सबसे पहले वर्ष 2000 में मानगढ़ का बलिदान पर देहिक भास्कर में लेख लिखा लोगो को अच्म्बा हुवा ,2001 में मानगढ़ पर यात्रा वर्तान्त जानी मानी पत्रिका पहल में लिखा,इस प्रकार पहली बार मिडिया के जरिये रियासती सासको के लाख दबाने के बावजूद मानगढ़ का सच जनता के सामने आया 2002-03 में हरी राम जी मीना की महनत और सहयोग से दूरदर्शन के कार्यकर्म रूबरू में दो एपिसोड मानगढ़ पर आये जिसे लाखो लोगो ने देखा और सराहा ,2008 में जंगल जंगल जलियावाला बाग यात्रा वृतांत के जरिये हरी राम मीणा जी ने मानगढ़ ,भुला बिलरिया व चिस्तिया की पाल के आदिवासी बलिदान को साहित्य जगत में जगह दिलाई पढ़कर लोगो की आखे फटी रह गई ,2008 में धुणी तपे तीर नमक उपन्यास के जरिया साहित्य जगत में मानगढ़ को सम्मान दिलाया जो पञ्च भासयो में प्रकाशित हो चूका और सेकड़ो लोग इस पर पी एच डी कर रहे है इसके बाद दूरदर्शन के 1 चेनल पर मानगढ़ पर लघु फिलम बनवाने में सहयोग किया रांची के फ़िल्मकार श्री प्रकाश के निर्देशन में बनी फिलम भारत का मौखिक इतिहास (ओरल हिस्ट्री ऑफ़ इंडिया ) में हरि राम मीणा जी ने अपने निजी परसों से मानगढ़ की इतिहासिक घटना को जगह दिलाई |18 नवम्बर के जनसत्ता आखबार में मानगढ़ पर हरि राम मीणा जी का विशेष लेख आया पढ़ कर बेहद खुशी हुई कितना सारगर्वित और अच्छा है |

कुछ प्रमुख कृतियाँ- हाँ, चाँद मेरा है, सुबह के इन्तज़ार में(2006-- दोनों कविता-संग्रह। रोया नहीं था यक्ष (2008)-- प्रबन्ध काव्य। साइबर सिटी से नंगे आदिवासियों तक-- यात्रा-वृत्तान्त। विविध दलित चेतना पर डा० अम्बेडकर राष्ट्रीय पुरस्कार(2000)।राजस्थान साहित्य अकादमी का सर्वोच्च ’मीरा पुरस्कार’। राजस्थान साहित्य अकादमी का सर्वोच्च ’मीरा पुरस्कार’।